UPSSSC लोअर मेन्स के लिए ध्वनियों का वर्गीकरण की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए ध्वनियों का वर्गीकरण की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।
| ध्वनि प्रकार | उप-प्रकार | उदाहरण |
|---|---|---|
| स्वर | ह्रस्व | अ, इ, उ, ऋ |
| व्यंजन | स्पर्श | क वर्ग से प वर्ग |
| व्यंजन | अंतःस्थ | य, र, ल, व |
| व्यंजन | ऊष्म | श, ष, स, ह |
जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से होता है, उन्हें स्वर कहते हैं। हिंदी में 11 मुख्य स्वर हैं।जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से होता है, उन्हें स्वर कहते हैं। हिंदी में 11 मुख्य स्वर हैं।
स्वरों की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते हैं। कुल मूल व्यंजन 33 हैं।स्वरों की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते हैं। कुल मूल व्यंजन 33 हैं।
क से म तक के 25 वर्ण स्पर्श व्यंजन हैं। इनके वर्ग इस प्रकार हैं: क-वर्ग (कण्ठ्य), च-वर्ग (तालव्य), ट-वर्ग (मूर्धन्य), त-वर्ग (दन्त्य), प-वर्ग (ओष्ठ्य)।क से म तक के 25 वर्ण स्पर्श व्यंजन हैं। इनके वर्ग इस प्रकार हैं: क-वर्ग (कण्ठ्य), च-वर्ग (तालव्य), ट-वर्ग (मूर्धन्य), त-वर्ग (दन्त्य), प-वर्ग (ओष्ठ्य)।
अंतःस्थ: य, र, ल, व (अर्धस्वर भी कहलाते हैं)। ऊष्म: श, ष, स, ह (इनके उच्चारण में घर्षण से ऊष्मा निकलती है)।अंतःस्थ: य, र, ल, व (अर्धस्वर भी कहलाते हैं)। ऊष्म: श, ष, स, ह (इनके उच्चारण में घर्षण से ऊष्मा निकलती है)।
अं (अनुस्वार) और अः (विसर्ग) को अयोगवाह कहा जाता है क्योंकि ये न तो पूर्ण स्वर हैं और न ही पूर्ण व्यंजन।अं (अनुस्वार) और अः (विसर्ग) को अयोगवाह कहा जाता है क्योंकि ये न तो पूर्ण स्वर हैं और न ही पूर्ण व्यंजन।
अघोष: प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा वर्ण (क, ख, च, छ...)। सघोष: प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पांचवां वर्ण (ग, घ, ङ...)।अघोष: प्रत्येक वर्ग का पहला और दूसरा वर्ण (क, ख, च, छ...)। सघोष: प्रत्येक वर्ग का तीसरा, चौथा और पांचवां वर्ण (ग, घ, ङ...)।
अल्पप्राण: 1, 3, 5 वर्ग। महाप्राण: 2, 4 वर्ग। महाप्राण में श्वास अधिक लगती है।अल्पप्राण: 1, 3, 5 वर्ग। महाप्राण: 2, 4 वर्ग। महाप्राण में श्वास अधिक लगती है।
1. स्पर्श व्यंजन को 'कु-चु-टु-तु-पु' सूत्र से याद रखें। 2. 'ह' का उच्चारण स्थान 'अलीजिह्वा' है। 3. 'य' और 'व' को अर्धस्वर कहते हैं क्योंकि इनका प्रयोग स्वरों की तरह भी होता है। 4. र के विभिन्न रूप (पदेन, रेफ) का ध्यान रखें।1. स्पर्श व्यंजन को 'कु-चु-टु-तु-पु' सूत्र से याद रखें। 2. 'ह' का उच्चारण स्थान 'अलीजिह्वा' है। 3. 'य' और 'व' को अर्धस्वर कहते हैं क्योंकि इनका प्रयोग स्वरों की तरह भी होता है। 4. र के विभिन्न रूप (पदेन, रेफ) का ध्यान रखें।